Saturday, June 8, 2013

शिवनाथ नदी  निकलती है महाराष्ट्र के गढ़चिरौली 

जिले से , पढ़ाया जा रहा पानाबरस छत्तीसगढ़

शिवनाथ नदी का उदगम स्‍थल 
अंग्रेजी राज में शिवनाथ नदी के उद्गम स्थल को लेकर जो गलती हुई, वह आज भी बदस्तूर जारी है। पाठ्यपुस्तकों से लेकर सामान्य ज्ञान की तमाम पुस्तकों और वेबसाइटों तक में शिवनाथ नदी का उद्गम राजनांदगांव जिले के अंबागढ़ चौकी के पास पानाबरस पहाड़ी पढ़ाया जा रहा है। जबकि वास्तविकता इसके ठीक उलट है। शिवनाथ नदी पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र के गढ़चिरोली जिले को गोडऱी गांव से निकलती है।
ऐसा नहीं है कि छत्तीसगढ़ शासन स्तर पर इसकी जानकारी नहीं है। संचालनालय संस्कृति एवं पुरातत्व ने बाकायदा शिवनाथ नदी के उद्गम से संगम तक का अध्ययन करवा 'संस्कृति सरिता शिवनाथ' पुस्तक प्रकाशित की थी, जिसका विमोचन पिछले साल मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने किया। इसके बावजूद स्कूली पाठ्यक्रम, प्रतियोगी परीक्षाओं और वेबसाइट में यह गलती जारी है।
छत्तीसगढ़ बोर्ड की 12 वीं में चल रही पुस्तक 'प्रबोध भूगोल' की इकाई 10 पृष्ठ 329 में लिखा है-''शिवनाथ का उद्गम राजनांदगांव जिले के अंबागढ़ तहसील के 625 मीटर ऊंची पानाबरस पहाड़ी से हुआ है, जो अपने उद्गम स्थल से 40 किमी की दूरी तक उत्तर की ओर बह कर बिलासपुर जिले की सीमा में पूर्व की ओर बहते हुए शिवरी नारायण के निकट महानदी में विलीन हो जाती है।'' यह पूरा का पूरा वाक्य ही अपने आप में गलत है, इसके बावजूद छत्तीसगढ़ के बच्चे यही गलत जानकारी सालों से पढ़ रहे हैं। 
 अंबागढ़ चौकी और पानाबरस के लोगों में इस तथ्य को लेकर कभी भ्रम नहीं रहा कि शिवनाथ नदी गोडऱी से निकलती है। पानाबरस गांव के 74 वर्षीय कोटवार बाबूदास मानिकपुरी बताते हैं कि उन्होंने भी 40 के दशक में कक्षा चौथी के भूगोल में यही पढ़ा था कि शिवनाथ नदी पानाबरस की पहाडिय़ों से निकलती है। हालांकि यह गलती अंग्रेजों के दौर की है, क्योंकि तब चंद्रपुर से दुर्ग तक का क्षेत्र चांदा तहसील में आता था। हो सकता है तब पानाबरस जमींदारी और कोटगुल जमींदारी को एक माना जाता रहा होगा। इसलिए कोटगुल से निकलने वाली शिवनाथ नदी को पानाबरस दर्ज किया गया। लेकिन अब तो इस गलती में सुधार किया जाना चाहिए। 
 

गोडऱी है शिवनाथ का वास्तविक उद्गम

उदगम स्‍थल के पास लेखक
शिवनाथ नदी का वास्तविक उद्गम महाराष्ट्र के गढ़चिरोली जिले की कोटगुल तहसील में कोरची से लगे गोडऱी गांव के समीप खेतों से होता है। 
अंबागढ़ चौकी से गोडऱी करीब 40 किमी की दूरी पर है। उद्गम स्थल इस मौसम में बिल्कुल सूखा है। उद्गम से लगा खेत कुमार साय तुलावी गोंड़ का है। कुमार साय की पत्नी खुज्जी बाई ने बताया कि 35-36 साल पहले उद्गम से बारहो महीना पानी झरते रहता था, लेकिन अब उद्गम से डेढ़ किमी आगे से ही पानी नजर आता है। यहीं पास में ग्रामीणों में खंडित अश्वारोहियों की प्रतिमाएं स्थापित कर मंदिर बनाया है। ग्रामीण इसे लमसेना-लमसेनी की प्रतिमा कहते हैं। जनश्रुतियों के अनुसार उद्गम स्थल के करीब पहाडिय़ों पर टीपागढ़ है। 
जहां के राजा के 7 बेटे व एक बेटी थी। बेटी के लिए दामाद खोज गया, जिसका नाम शिवनाथ था। बदलते घटनाक्रम में इसी जगह शिवनाथ की बलि दे दी गई थी। शिवनाथ को खोजते हुए पहुंची राजकुमारी के पल्लू से शिवनाथ की उंगली की अंगूठी टकराई और लाश बाहर आ गई। इसके बाद पानी का स्त्रोत फूट पड़ा और दोनो बह गए। इसी जनश्रुति पर अब इस्पात नगरी भिलाई के लोकवाद्य संग्राहक रिखी क्षत्रिय एक महानाट्य की तैयारी भी कर रहे हैं। रिखी को उम्मीद है कि इस महानाट्य से लोगों को शिवनाथ के वास्तविक उद्गम स्थल की जानकारी मिलेगी।

जनश्रुति के अनुसार यह खण्डित
प्रतिमायें लमसेना-लमसेनी की हैं
'' छत्तीसगढ़ शासन की नदियों के उद्गम से संगम तक सर्वेक्षण की परियोजना में मुझे शिवनाथ नदी के अध्ययन का दायित्व दिया गया था। पूर्व में प्रचारित पानाबरस की पहाडिय़ों तक मैं भी पहुंचा था, तब वहां मुझे गढ़चिरोली (महाराष्ट्र) में शिवनाथ के उद्गम की जानकारी मिली। स्थल निरीक्षण और विस्तृत सर्वेक्षण के बाद इस संबंध में अब कोई भ्रम नहीं रह गया है। पाठ्य पुस्तकों और प्रतियोगी परीक्षाओं में यह गलती सुधारी जानी चाहिए।'' 
कामता प्रसाद वर्मा, संस्कृति व पुरातत्व विभाग में कार्यरत एवं शासन की पुस्तक 'संस्कृति सरिता शिवनाथ'  के लेखक
''19 वीं शताब्दि की शुरूआत में नदियों के उद्गम स्थल को लेकर गंभीरतापूर्वक अध्ययन नहीं हुआ था। इसलिए अंग्रेजी शासन काल में शिवनाथ नदी का उद्गम स्थल त्रुटिवश अंबागढ़ चौकी के समीप पानाबारस पहाड़ी दर्ज किया गया। आज भी वही गलती चल रही है और इसे तत्काल सुधारा जाना चाहिए। इसमें भारतीय सर्वेक्षण विभाग को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी, ताकि छत्तीसगढ़ के सामान्य ज्ञान को लेकर भ्रम की स्थिति न रहे।'' 
प्रो. लक्ष्मीशंकर निगम, प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व के ज्ञाता
''हम लोगों ने प्रबोध भूगोल 7 साल पहले लिखी थी। आज भी वही किताब 12 वीं में चल रही है। इस वक्त मैं नहीं बता पाउंगा कि हमनें किस आधार पर शिवनाथ नदी का उद्गम पानाबरस की पहाड़ी लिखा है। वैसे आप अगर महाराष्ट्र का गढ़चिरोली जिला बता रहे हैं, तो संभव है वह सही होगा। आम तौर पर पाठ्यपुस्तकों में लोकप्रिय मान्यताओं को भी तथ्यों के तौर पर दर्ज कर लिया जाता है। हमारी पुस्तक में शिवनाथ नदी के 40 किमी बह कर बिलासपुर मे मिलने वाला तथ्य त्रुटिवश आ गया है, वह सही नहीं है।'' 
डॉ. राजशेखर, सीजी बोर्ड की 12 वीं में चल रही पुस्तक 'प्रबोध भूगोल' के तीन लेखकों में से एक 

Wednesday, May 29, 2013

जलाभिषेक की अनूठी मिसाल कायम की एक शिवभक्त ने

अब इसे विश्व रिकार्ड में दर्ज करवाने की तैयारी

मानसरोवर झील से पवित्र  जल लेते श्री चावड़ा 
ट्विन सिटी के एक शिवभक्त ने एक अनूठा कदम उठाते हुए कैलाश मानसरोवर के जल से देश भर के प्रचलित सभी ज्योतिर्लिंगों के जलाभिषेक पूरे किए हैं। पद्मनाभपुर दुर्ग निवासी अधिवक्ता विनोद चावड़ा अपने इस प्रयास को गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड मेें दर्ज करवाने जा रहे हैं। 
अपने इस प्रयास के बारे में श्री चावड़ा ने बताया कि उन्होंने कैलाश मानसरोवर की तीन यात्राएं 2009,10 और 12 में की थी। पहली यात्रा के दौरान ही मन में विचार आया कि क्यों न ज्योर्तिलिंगों का अभिषेक इस पवित्र जल से किया जाए। इसके लिए त्र्यंबकेश्वर से यात्रा शुरू हुई और जब महाराष्ट्र में 5 स्थानों पर जल चढ़ाया तो स्वत: ही 'शिवप्रेरणाÓ मिली कि क्यों न देश भर के तमाम ज्योर्तिलिंगों पर इसी जल से जलाभिषेक किया जाए। इस तरह रास्ते बनते गए। उनके हर सफर में परिजन और करीबी लोग भी साथ थे। बीते दशक में रावघाट लौह अयस्क खदान के निजीकरण के रहस्योद्घाटन के बाद आंदोलन शुरू करने और अंजाम तक पहुंचा कर सुर्खियों में आए अधिवक्ता श्री चावड़ा ने बताया कि उन्होंने अपने निवास से 29 सितंबर 10 को मानसरोवर के जल से ज्योर्तिलिंगों के जलाभिषेक की अनूठी तीर्थयात्रा की शुरुआत की थी, जो इस साल 16 मई को घुष्मेश्वर राजस्थान के साथ संपन्न हुई। 
'रावघाट के योद्धाÓ एवं भिलाई स्टील प्लांट द्वारा सन 2010 में 'भिलाई मित्र पुरस्कारÓ से सम्मानित श्री चावड़ा ने बताया कि गिनीज बुक में इसे दर्ज कराने का विचार जलाभिषेक के दौरान ही आया। क्योंकि जहां भी वह गए, स्थानीय पुजारियों से लेकर कई जानकार लोगों ने यही बताया कि कैलाश मानसरोवर से जल लाकर जलाभिषेक करने की अपने आप में यह अब तक की पहली अनूठी घटना है। जिसका पूर्व में कहीं भी उल्लेख नहीं मिलता। इसलिए वह गिनीज बुक विश्व रिकार्ड के लिए 40 हजार रुपए की औपचारिक फीस के साथ वह आवेदन कर रहे हैं। 
12 नहीं 15 ज्योर्तिलिंगों का जलाभिषेक किया
घुष्मेश्वर शिवाड़ राजस्थान में जलाभिषेक करते श्री चावड़ा 
श्री चावड़ा ने बताया कि पौराणिक कथाओं एवं ज्ञात इतिहास के अनुसार देश में भगवान शंकर के द्वादश (बारह) ज्योर्तिलिंग है,लेकिन इन घोषित 12 ज्योर्तिलिंगों के अतिरिक्त 3 ज्योर्तिलिंगों के देखरेख कर्ता ट्रस्टी संस्थानों द्वारा अपने-अपने इन 3 अतिरिक्त ज्योर्तिलिंगों को भी बारह ज्योर्तिलिंगों में से एक मुख्य ज्योर्तिलिंग बतलाया जाता है। इसी कारण से उन्होंने इन सभी 15 ज्योर्तिलिंगों का मानसरोवर के पवित्र जल से जलाभिषेक 2 वर्ष 11 माह की अवधि में किया।
मानसरोवर झील के पवित्र जल से यहां किया जलाभिषेक जलाभिषेक 
2010 में महाराष्ट्र में औंढा नागनाथ हिंगोली, परली बैजनाथ बीड, भीमा शंकर खेड़ पुणे, त्र्यंबकेश्वर नासिक, घृष्णेश्वर औरंगाबाद, 2011 में काशी विश्वनाथ वाराणसी उप्र, बाबा बैजनाथ देवघर झारखंड, केदारनाथ पौढ़ी गढ़वाल उत्तराखंड, ओमकारेश्वर खंडवा मध्यप्रदेश, महाकालेश्वर उज्जैन मध्यप्रदेश, श्री शैलम मल्लिकार्जुन आंध्र प्रदेश, नागेश्वर जामनगर गुजरात, सोमनाथ वेरावल गुजरात और रामेश्वरम तमिलनाडू, 2013 में घुष्मेश्वर शिवाड़ राजस्थान। 
चांदी के लोटे के साथ तीनों बार मानसरोवर पहुंचा भक्तों का फिंगर प्रिंट 
अपने घर में चांदी के लोटे के साथ श्री चावड़ा 
श्री चावड़ा ने बताया कि अपनी तीन मानसरोवर यात्राओं में वह चांदी का विशेष लोटा साथ लेकर गए थे। इस लोटे की तीनों बार पूजा अर्चना की गई। इसके साथ ही वह इसमें उन सभी परिचित शिवभक्तों के हाथों टीका लगवाते थे। इसके पीछे उनका मानना है कि जो शिवभक्त वहां नहीं पहुंच सकते, कम से कम उनके फिंगर प्रिंट वहां पहुंच जाए। श्री चावड़ा ने बताया कि इस चांदी के लोटे के अलावा वह वहां मिलने वाले 5 लीटर के केन में भी मानसरोवर झील का जल लाते रहे हैं। इस जल से वह सभी ज्योतिर्लिंगों का अभिषेक कर चुके हैं। वहीं अब जल चूंकि कम हो रहा था तो इसमें उन्होंने अपनी जीवनदायिनी शिवनाथ नदी का जल मिलाया है। श्री चावड़ा ने बताया कि गिनीज बुक में दावेदारी के लिए वह सभी यात्राओं से जुड़े दस्तावेज, फोटोग्राफ्स और वीडियो को प्रमाण के तौर पर प्रस्तुत कर रहे हैं।
विनोद चावड़ा द्वारा संपादित शिव भक्ति की नयी रीत
 कैलाश मानसरोवर यात्राएं एवं यात्रा के दौरान मानसरोवर झील से संग्रहित पवित्र जल से सभी ज्योर्तिलिंगों का रिकार्ड अवधि में जलाभिषेक ।

विनोद चावड़ा की उपरोक्त एैतिहासिक यात्राओं के दौरान सहयात्रियों के नाम
कैलाश-मानसरोवर यात्रा- 
2009 - पं. विष्णु प्रसाद शर्मा, कसारीडीह, दुर्ग।
2010 - अमृतभाई सोलंकी, श्रीमती चंदुलाबेन अमृतभाई सोलंकी (पशुपतिनाथ/काठमांडु तक के सहयात्री), सोलंकी मेडिकल, दुर्ग।
अमित अमृतभाई सोलंकी, सोलंकी मेडिकल, दुर्ग। 
2012 - नीरजभाई अमृतलालभाई वेगड़ एवं संतोष मिश्रा, दोनों जबलपुर से, श्रीमती एवं श्री सूरज रामसुजान मिश्रा, पदमनाभपुर, दुर्ग 
मानसरोवर झील के पवित्र जल से 15 ज्योर्तिलिंगों के जलाभिषेक यात्राओं के सहयात्रीगण:-
अमृतभाई सोलंकी, चंदुलाबेन सोलंकी, प्रभाबेन सोलंकी, धरमसीभाई टांक, निर्मलाबेन टांक, प्रदीप चौबे सपत्निक एवं बड़ी बहन के साथ, नीरजभाई लीना वेगड़, सोनिया चावड़ा एवं रेणुकाबेन सोलंकी।
डॉ. महेशचंद्र शर्मा, धर्म व संस्कृति के जानकार
नोट-उपरोक्त महिला सहयात्रियों में से 2 सहयात्रियों द्वारा भी 11 माह 26 दिवस की अवधि में मानसरोवर झील के पवित्र जल से 14 ज्योर्तिलिग का जलाभिशेक करके षिव भक्ति की इस नयी रीत का रिकार्ड महिलाओं द्वारा बनाये जाने की उपलब्धि (रिकार्ड) को हासिल किया जा चुका है। ये महिला सहयात्री 1 ज्योर्तिलिंग का अभिषेक करने से अपरिहार्य कारणों से वंचित रह गयी है।

वास्तव में दुर्लभ है ऐसा जलाभिषेक
शिवजी का जलाभिषेक करने लोग आस-पास से जल लाते हैं, खास तौर पर पास की नदियों का। इसके अलावा लोग गंगाजल से भी जलाभिषेक करते हैं। लेकिन यह वास्तव में दुर्लभ है कि कोई कैलाश मानसरोवर जाए और वहां से जल लाकर पूरे भारत में ज्योर्तिलिंगों का जलाभिषेक करे। मानसरोवर झील के जल की अपनी मान्यता है और इसे बेहद पवित्र माना जाता है। यह विलक्षण इसलिए है कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा भी बड़ी दुर्गम है और यह शिवजी का निवास स्थान माना जाता है। अधिवक्ता श्री चावड़ा की यह पहल वास्तव में अनूठी है। 

टाउनशिप का विवाद सुलझाना बड़ी चुनौती

कुम्हारी गाँव की सरहद 
 रावघाट परियोजना शुरू होने में एक बड़ी चुनौती टाउनशिप का विवाद सुलझाना है। रावघाट से अंतागढ़ और नारायणपुर दोनों समान दूरी (25 किमी) पर है। दोनों इलाके के लोगों के अपने-अपने दावे हैं और इन दावों के पीछे आंदोलनकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों का समर्थन भी है। ऐसे में भिलाई स्टील प्लांट मैनेजमेंट तय नहीं कर पा रहा है कि माइंस की टाउनशिप कहां होगी..? इस बीच रावघाट परियोजना के निजीकरण की आहट को देखते हुए भी स्थानीय लोग खुद को ठगा हुआ सा महसूस कर रहे हैं।
रावघाट की माइनिंग लीज मिलने के बाद बीएसपी के सामने टाउनशिप तय करने की सबसे बड़ी चुनौती रही है। स्थानीय जनप्रतिनिधि और आंदोलनकारी शुरू से दल्ली राजहरा की तरह की सर्वसुविधायुक्त टाउनशिप मांगते रहे हैं। बीएसपी के सामने दिक्कत है कि वह टाउनशिप बनाएं तो कहां? बीएसपी ने इस विवाद को देखते हुए कई मामलों में बीच का रास्ता निकाला भी है। सूत्रों की मानें तो अंतागढ़ में टाउनशिप के लिए कुम्हारी गांव व मेढक़ी नदी के बीच की चिह्नित जगह  पर कर्मचारियों के लिए मकान बनाने की तैयारी है, वहीं नारायणपुर में अफसरों के लिए लिए सर्वसुविधायुक्त आवास बनाए जाएंगे।
अपनी निगमित सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) के तहत बीएसपी ने अंतागढ़ -नारायणपुर दोनों जगह समान रुप से कार्य शुरू किया है, यहां तक कि कार्यों का ज्यादातर बंटवारा भी दोनों जगह समान रुप से किया गया है। बीएसपी 60 स्कॉलरशिप दे रही है, जिसमें 30 अंतागढ़ और 30 नारायणपुर से है। बीएसपी ने रामकृष्ण मिशन आश्रम के साथ मिलकर अगर नारायणपुर में वार्षिक खेल मेला शुरू किया है तो अंतागढ़ के स्टेडियम को संवार कर वहां अंतरशालेय फुटबॉल टूर्नामेंट भी शुरू किया है। बीएसपी की नीति दोनों इलाके के लोगोंको संतुष्ट करने की है लेकिन अंसतोष लगातार बढ़ रहा है। इससे बीएसपी का सेवा कार्य भी विवादित होता जा रहा है। अंतागढ़ निवासी और रावघाट संघर्ष समिति से जुड़े अनिल चंदेल बताते हैं-राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी)बैलाडीला में लौह अयस्क का खनन कर रहा है लेकिन उसकी स्कॉलरशिप का फायदा समूचे बस्तर संभाग को मिलता है।
यही नहीं बीएससी नर्सिंग कोर्स के लिए एनएमडीसी वाले समूचे बस्तर से छात्राओं को चयनित कर हैदराबाद ले जाते हैं। इसके विपरीत बीएसपी ने स्कालरशिप के लिए सिर्फ 20 गांवों को चुना है। नर्सिंग कोर्स के लिए पहले  हर साल महज 2 छात्राओं को भिलाई ले जाते थे, पिछले साल अक्टूबर में हमारे आंदोलन के चलते दबाव बढ़ा तो आनन फानन में बीएसपी ने 20 छात्राओं को नर्सिंग कोर्स कराने मंजूरी दी। बीएसपी अपना सेवा कार्य यहां सिर्फ 18-20 गांवों में ही कर रहा है, जबकि भविष्य में प्रदूषण की चपेट में तो समूचे अंतागढ़ के गांव आएंगे। हम चाहते हैं कि यहां हमारे अंतागढ़ की आईटीआई के छात्रों को भिलाई में अप्रेंटिसशिप का मौका मिले। बीएसपी यहां एक अंग्रेजी माध्यम का स्कूल शुरू करे और गांव-गांव मेडिकल वैन घुमाने के साथ-साथ अंतागढ़ में एक सर्वसुविधायुक्त अस्पताल भी खोले।
टाउनशिप तो कुम्हारी में ही बनेगी
विक्रम उसेंडी 
अंतागढ़ क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रदेश के वनमंत्री विक्रम उसेंडी का कहना है कि टाउनशिप कुम्हारी में ही बनेगी। राजधानी रायपुर में श्री उसेंडी ने बताया कि 4 साल पहले ही जिला प्रशासन, बीएसपी मैनेजमेंट और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ कुम्हारी गांव के पास मेंढक़ी नदी से लगी हुई 500 एकड़ की राजस्व भूमि टाउनशिप के लिए चिह्नित की जा चुकी है। इसके बाद विवाद तो होना नहीं चाहिए। माओवादी धमकियों के संबंध में श्री उसेंडी का कहना है कि वह नहीं बता सकते कि वास्तव में धमकी कौन दे रहा है लेकिन वहां पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था है और परियोजना शुरू होने में कोई खतरा नहीं है। रावघाट के निजीकरण संबंधी सवाल पर श्री उसेंडी ने अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि अभी तक तो उन्हें कोई जानकारी नहीं है लेकिन स्थानीय हितों पर आंच आएगी तो इस परियोजना का विरोध करने वालों में सबसे पहले मैं सामने आऊंगा।

रावघाट की टाउनशिप कनेरा में फाइनल 


रावघाट लौह अयस्क परियोजना के अंतर्गत बीएसपी अपनी सक्रियता बढ़ाते हुए खनन जल्द से जल्द शुरू करने की कोशिश कर रही है। इससे पहले बीएसपी के अफसर नागरिक सुविधाओं को लेकर विवाद हल करने में जुटे हैं। रावघाट में नागरिक सुविधाओं को लेकर सबसे बड़ा मुद्दा टाउनशिप का था।
 राज्य शासन के दखल के बाद यह मुद्दा अब लगभग सुलझ चुका है। बीएसपी माइंस विभाग के  एक वरिष्ठ अफसर ने बताया कि टाउनशिप के लिए अंतागढ़ के पास कुम्हारी, ताड़ोकी और नारायणपुर के पास बिजली व कनेरा गांव का सर्वे हुआ था। चूंकि अंतागढ़ और नारायणपुर दोनों इलाके के लोग अपने-अपने क्षेत्र में टाउनशिप मांग रहे थे और इन मांगों के पीछे दोनों जगहों के विधायक विक्रम उसेंडी और केदार कश्यप भी सक्रिय थे, इसलिए इसमें राज्य शासन ने हस्तक्षेप की। मुख्यमंत्री की मध्यस्थता में दोनों क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों की बैठकें हुई और अंतत: सहमति कनेरा गांव पर बनी।
कनेरा गांव में टाउनशिप बनाने के लिए सर्वे व पेड़ कटाई का काम पिछले साल 25 अक्टूबर 2012 को पूरा हो चुका है। बीएसपी मैनेजमेंट चूंकि अंतागढ़ के लोगों को भी नाराज नहीं करना चाहता, इसलिए कुम्हारी गांव में कर्मचारियों के लिए आवास बनाने की भी योजना है। वहीं अंतागढ़ में अस्पताल इसी माह से शुरू किया जा रहा है। प्रबंधन सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक फिलहाल किराए के भवन में अस्पताल शुरू किया जा रहा है लेकिन जल्द ही खुद का भवन भी बना लिया जाएगा। 

जवानो-अफसरों के लिए जुटाई जा रही सुविधाएं 


नारायणपुर की ओर से रावघाट जाने का मार्ग 

रावघाट परियोजना की सुरक्षा के लिए अर्धसैनिक बलों की टुकडिय़ों की तैनाती शुरू हो गई है। वहीं कुछ कर्मी और अफसर भी नारायणपुर में कैंप कर प्रोजेक्ट को गति देने में जुटे हैं। इन अफसरों और सुरक्षा बल के जवानों के लिए बीएसपी ने नारायणपुर में गेस्ट हाउस बनाने वहां के कलेक्टर को फाइल इस साल 31 जनवरी को सौंप दी गई है। वहीं आवाजाही के लिए वाहन भी किराए से लिए जा रहे हैं। सुरक्षा बलों के लिए फिलहाल दो बैरक तैयार हो चुके हैं, वहीं आगे और भी बैरक बनाने सामानों की खरीद के लिए बीएसपी ने टेंडर जारी कर दिया है।