Saturday, February 22, 2020

इस्पात मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान बोले- वाह

 भिलाई की पूरी कहानी लिख दी आपने 


 ‘वोल्गा से शिवनाथ तक’ के द्वितीय संस्करण का किया विमोचन


‘वोल्गा से शिवनाथ तक’ के लेखक व पत्रकार मुहम्मद जाकिर हुसैन ने अपने इस ऐतिहासिक कृति में भिलाई इस्पात संयंत्र के प्रेरक इतिहास को बड़े ही रोचक शैली में संजोने का सफल प्रयास किया है। इसके प्रथम संस्करण की लोकप्रियता को देखते हुए इसके दूसरे संस्करण को शीघ्र ही प्रकाशित किया गया।


स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड-सेल की ध्वजवाहक इकाई भिलाई इस्पात संयंत्र व इसकी खदानों के रोचक इतिहास को संजोती लेखक व पत्रकार मुहम्मद जाकिर हुसैन की कृति ‘वोल्गा से शिवनाथ तक’ के दूसरे संस्करण का विमोचन पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस एवं इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने किया। 
20 फरवरी 2020 गुरूवार की शाम भिलाई निवास में एक संक्षिप्त किंतु गरिमामय समारोह में सेल के डायरेक्टर (प्रोजेक्ट्स एवं बिजनेस प्लानिंग) तथा भिलाई इस्पात संयंत्र के सीईओ अनिर्बान दासगुप्ता तथा न्यू प्रेस क्लब आॅफ भिलाई की अध्यक्ष भावना पांडे भी लेखक के साथ विशेष रूप से उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि लेखक व पत्रकार मुहम्मद जाकिर हुसैन की किताब ‘वोल्गा से शिवनाथ तक’ के प्रथम संस्करण का विमोचन गत वर्ष 7 फरवरी, 2019 को राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह व प्रथम मुख्यमंत्री  अजीत जोगी ने एक साथ एक गरिमामय समारोह में किया था। भारत और तत्कालीन सोवियत संघ के संबंधों के परिप्रेक्ष्य में भिलाई व इसकी खदानों के रोचक इतिहास पर केंद्रित इस किताब के दूसरे संस्करण में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड के डायरेक्टर (प्रोजेक्ट्स एवं बिजनेस प्लानिंग) तथा भिलाई इस्पात संयंत्र के मुख्य कायर्पालक अधिकारी अनिर्बान दासगुप्ता का साक्षात्कार और भिलाई व इसकी खदानों के इतिहास से जुड़ी रोचक सामग्री शामिल की गई है।
विमोचन अवसर पर डायरेक्टर (प्रोजेक्ट्स एवं बिजनेस प्लानिंग) तथा बीएसपी के सीईओ  अनिर्बान दासगुप्ता ने इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को किताब की पृष्ठभूमि व लेखक के कार्य से अवगत कराया। मंत्री प्रधान ने लेखक मुहम्मद जाकिर हुसैन के कार्य की सराहना करते हुए इतिहास के दस्तावेजीकरण के क्षेत्र में इसे एक उल्लेखनीय पहल बताया।
 इस दौरान लेखक ने जब बताया कि इस किताब में भिलाई के सारे चीफ ऑफ एग्ज़ीक्यूटिव और सारे प्रमुख रशियन के इंटरव्यू है तो मंत्री प्रधान बोले- वाह भिलाई की पूरी कहानी लिख दी आपने।  इस अवसर पर न्यू प्रेस क्लब ऑफ भिलाई के पदाधिकारीगण, विभिन्न समाचार पत्र और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधि सहित इस्पात मंत्रालय, सेल-बीएसपी के उच्च अधिकारी भी उपस्थित थे।
विदित हो कि लेखक मुहम्मद जाकिर हुसैन ने इससे पूर्व प्रकाशित ‘भिलाई एक मिसाल-फौलादी नेतृत्वकताओं की’ अपनी पुस्तक में भिलाई इस्पात संयंत्र के नेतृत्वकर्ताओं के ऊपर भी अपनी लेखनी का लोहा मनवा चुके हैं। इसके अतिरिक्त अपनी पुस्तक ‘इस्पात नगरी का फौलादी रंगकर्मी-सुब्रत बसु’ में उन्होेंने भिलाई के प्रसिद्ध रंगकर्मी एवं सुप्रसिद्ध फिल्म निर्देशक अनुराग बसु के पिता सुब्रत बसु के जीवन संघर्ष को बखूबी पिरोया है।
आप यहाँ आयोजन से जुड़ा एक दिलचस्प वीडिओ देख सकते हैं, जिसमे इस्पात मंत्री प्रधान को सेल के डायरेक्टर प्रोजेक्ट मेरी किताब के बारे में बता रहे हैं और मैंने भी उन्हें कुछ बताया इसके बाद इस्पात मंत्री ने अपनी टिप्पणी की । यह वीडिओ मौके पर मौजूद मेरे भांजे अल्तमश शेख ने बनाया है
विमोचन समारोह की खबर विभिन्न समाचार पत्रों और वेब पोर्टल पर प्रकाशित हुई । इनमे से कुछ लिंक शीर्षक को क्लिक कर भड़ास4मीडिया  ब्लास्ट न्यूज़  स्टील सिटी ऑनलाइन  मितान भूमि  जोगी एक्सप्रेस  छत्तीसगढ़ न्यूज़ एंड इंफार्मेशन नेटवर्क  डेली हंट क्रांतिकारी संकेत डेली हंट ई संस्करण दैनिक विश्व परिवार विज़न न्यूज़ सर्विस  पढ़ सकते हैं।
वहीँ क्लिपर-28 में हेडिंग और फोटो तो विमोचन की है लेकिन भूलवश पूरी खबर दूसरे समारोह की है. 

‘वोल्गा से शिवनाथ तक’ का विमोचन किया 

छत्तीसगढ़ के वर्तमान, पूर्व और प्रथम मुख्यमंत्री ने


भिलाई के निर्माण में सोवियत रूस और भारतीयों के योगदान पर केंद्रित है यह किताब

इस्पात नगरी भिलाई के पत्रकार व लेखक मुहम्मद जाकिर हुसैन की शोधपूर्ण किताब ‘वोल्गा से शिवनाथ तक’ का विमोचन छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने 7 फरवरी 2019 गुरुवार की शाम राजधानी रायपुर में आयोजित एक गरिमामय समारोह में एक साथ किया। इस्पात नगरी भिलाई के निर्माण में सोवियत रूस और भारतीय नागरिकों के योगदान पर केंद्रित इस किताब को अतिथियों ने बेहद सराहा और लेखक को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
लेखक/पत्रकार मुहम्मद जाकिर हुसैन की भिलाई के इतिहास पर केंद्रित यह दूसरी किताब है। इसके पहले 2011 में उनकी लिखी किताब ‘भिलाई एक मिसाल’ का प्रकाशन भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन द्वारा किया गया था। जिसमें भिलाई स्टील प्लांट की स्थापना काल से लेकर 2011 तक के सभी कार्यकारी प्रमुख (जीएम, एमडी व सीईओ) के साक्षात्कार व उनके काल से जुड़ी दुर्लभ घटनाओं का लेखक ने ब्यौरा दिया था। इसके बाद भिलाई पर केंद्रित ‘वोल्गा से शिवनाथ तक’ उनकी दूसरी किताब है। जिसमें लेखक ने भिलाई की स्थापना में सहयोग देने वाले तत्कालीन सोवियत संघ के इंजीनियरों, अनुवादकों व अन्य सहायकों की भूमिका पर विस्तार से रोशनी डाली है। इस पुस्तक में शुरूआती दौर से वर्तमान तक भिलाई में सेवा दे रहे रशियन इंजीनियर/दंपति के साक्षात्कार व प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं का दुर्लभ फोटोग्राफ्स सहित ब्यौरा है।
हरिभूमि समाचार पत्र के इलेक्ट्रॉनिक चैनल आईएनएच न्यूज के टाटा स्काई पर लांचिंग अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में हरिभूमि समाचार पत्र समूह के चेयरमैन कैप्टन रूद्रसेन सिंधु, प्रबंध संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी,रावघाट के योद्धा की उपाधि से विभूषित माइनिंग अधिवक्ता विनोद चावड़ा और प्रकाशक डॉ. सुधीर शर्मा भी विशेष रूप से मंच पर मौजूद थे। विमोचन समारोह में विशेष रूप से विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत, छत्तीसगढ़ शासन के मंत्रीगण ताम्रध्वज साहू, रविंद्र चौबे, टीएस सिंहदेव, उमेश पटेल, पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय व भिलाई विधायक देवेंद्र यादव सहित शासन-प्रशासन के कई गणमान्य अधिकारी, मंत्रीगण, विधायकगण व नागरिक मौजूद थे। ‘वोल्गा से शिवनाथ तक’ को वैभव प्रकाशन की सहयोगी संस्था सर्वप्रिय प्रकाशन नई दिल्ली ने प्रकाशित किया है और जल्द ही व्यावसायिक तौर पर बाजार में उपलब्ध कराने की तैयारी है।
विमोचन समारोह का वीडिओ आप यहाँ देख सकते हैं।
7 फरवरी 2019 विमोचन समारोह की रिपोर्ट 

Friday, February 21, 2020

कश्मीरी पंडितों के लिए महाशिवरात्रि
का जश्न अधूरा है बगैर मुसलमानों के


भिलाई में बसे कश्मीरी पंडित ने साझा की ‘हेरत’ की रौनक से जुड़ी यादें


वटक में भिगोए गए मेवे 
कश्मीर में अलगाववाद का दौर शुरू होने से पहले तक पंडित समुदाय ‘हेरत’ (महाशिवरात्रि) का त्यौहार जिस उल्लास के साथ मनाता था, उसकी अब सिर्फ यादें रह गई हैं। 
कश्मीरी पंडित समुदाय बरसों से अपनी जमीन पर ‘हेरत’ नहीं मना पाया है लेकिन इन लोगों की जिंदगी में एक बड़ी ख्वाहिश है कि एक बार फिर वही साझा संस्कृति का दौर लौट आए। माना जाता है कि ‘हेरत’ संभवतः हरि-रात्रि शब्द का अपभ्रंश है।
कश्मीरी पंडित समुदाय के भिलाई में रह रहे एक प्रमुख सदस्य संतोष कुमार किचलु को आज भी वह दौर याद है, जब उनके अपने पैतृक निवास शोपियां में महाशिवरात्रि पर्व की रौनक हुआ करती थी। 
श्रमिक संगठन इंटुक के उपाध्यक्ष और सेक्टर-5 निवासी संतोष किचलु यहां भिलाई स्टील प्लांट के ब्लूमिंग एंड बिलेट मिल  में  मास्टर आपरेटर  पर कार्यरत हैं और उनके पिता स्व. निरंजननाथ किचलु भी बीएसपी में सेवारत थे।
संतोष किचलु ने 1986 तक शोपियां में मनाये ‘हेरत’ यानि महाशिवरात्रि पर्व की याद करते हुए बताया कि वहां अलगाववाद के दौर के पहले हिंदु-मुस्लिम सब मिलजुलकर मनाते थे।
 कश्मीर में चूँकि  पंडित समुदाय शैव मत का मानने वाला है, इसलिए वहां हर कश्मीरी पंडित परिवार में रवायत रही है कि सुबह नहाने के बाद लोग मंदिर में शिवजी को जल चढ़ाते हैं और इसके बाद घर आकर अपनी दिनचर्या शुरू करते हैं। 
जहां तक शिवरात्रि पर्व या ‘हेरत’ की बात है तो हमारे यहां इसकी तैयारी महीना भर पहले शुरू हो जाती थी। अखरोट, बादाम और दूसरे मेवे एक खास किस्म के पारंपरिक मिट्टी के बर्तन वटक में भिगा दिए जाते हैं, जिन्हे शिवरात्रि के दिन खोला जाता है और प्रसाद के तौर पर बांटा जाता है।
‘हेरत’ पर्व की रौनक का जिक्र करते हुए किचलू ने बताया कि वहां सारे लोग उस दिन सुबह-सुबह उठ कर जुलूस की शक्ल में इकठ्ठा होकर अहरबल कुंड से निकलने वाले ठंडे पानी से नहाते जाते थे और फिर पूजा के बाद बड़ा जुलूस निकलता था, जो शाम शाम तक एक बड़े जुलूस में तब्दील हो जाता था।
संतोष किचलू के साथ एक सेल्फी
‘हेरत’ के जश्न में ‘सलाम’ की खास अहमियत है। जिसमें हिंदु-मुस्लिम सब एक दूसरे को मुबारकबाद देते हैं। मुस्लिम समुदाय की इस पर्व में भागीदारी के संबंध में किचलू कहते हैं-हम लोग बगैर मुसलमानों के ‘हेरत’ की कल्पना भी नहीं कर सकते।
 इस पर्व के लिए जितना भी दूध-दही और मेवा है, सब मुसलमानों के घर से आता था। वहां हम सब की साझी विरासत थी इसलिए सब मिलजुलकर इसे मनाते थे।
बाद के दौर का जिक्र करते हुए किचलू कहते हैं-अब तो तीन दशक हो गए हैं, हम लोग अपने घर ही नहीं जा पाए हैं। रिश्तेदार जम्मू और दिल्ली में है। इसलिए आना-जाना लगा रहता है।
 इसके बावजूद ‘हेरत’ की वो रौनक अब नजर नहीं आती। यहाँ भिलाई में मनाये जाने वाले ‘हेरत’के सम्बंध में किचलू कहते हैं -अब तो यहाँ गिनती के परिवार हैं। फिर भी सब मिलजुल कर मानते हैं।
यहाँ मिटटी के खास बर्तन वटक तो नहीं मिलते इसलिए हम लोग पीतल /इ स्टील के बर्तन में ही एक रात पहले तमाम मेवे भीगा देते हैं और उसके बाद आज शिवरात्रि पूजन कर शाम को परिवार के सब लोग इकठ्ठा होते हैं। जिसमे मिलकर खाना कहते हैं और बच्चों को ‘हेरत’ के खर्च के तौर पर रूपए देते हैं। 
किचलू कहते हैं- बीते साल 5 अगस्त को केंद्र सरकार द्वारा धारा-370 हटाए जाने के बाद से हम लोग भी इंतजार कर रहे हैं कि वापस हम अपनी जमीन पर जा सकें। हम भी चाहते हैं कि कश्मीर में उसी साझा संस्कृति का दौर फिर से लौटे।