Tuesday, February 24, 2026

 "भिलाई जिंदाबाद" का विमोचन किया फिल्मकार अनुराग बसु ने



 इस्पात नगरी भिलाई के लेखक व पत्रकार मुहम्मद जाकिर हुसैन की नई किताब "भिलाई जिंदाबाद, कुछ किस्से-कहानियां" का विमोचन फिल्मकार अनुराग बसु ने रविवार 25 जनवरी 2026 को किया किया। राजधानी नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में आयोजित साहित्य उत्सव के समापन समारोह में अनुराग ने यह विमोचन किया। उन्होंने इस्पात नगरी भिलाई पर आधारित रोचक सामग्री को सराहा और लेखक को अपनी शुभकामनाएं दी।
उल्लेखनीय है कि वैभव प्रकाशन नई दिल्ली-रायपुर से प्रकाशित इस किताब में इस्पात नगरी भिलाई के स्थापना काल सेे अब तक के प्रमुख व रोचक घटनाक्रम को लेखक मुहम्मद जाकिर हुसैन ने कलमबद्ध किया है। इसके पूर्व  लेखक की "भिलाई एक मिसाल" और "वोल्गा से शिवनाथ तक" किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं, जो इस्पात नगरी भिलाई के इतिहास पर केंद्रित है।

"भिलाई जिंदाबाद.." में क्या खास है..? 


इस्पात नगरी भिलाई के निर्माण काल से अब तक कुछ रोचक और हैरतअंगेज घटनाक्रमों को लेखक मुहम्मद जाकिर हुसैन ने अपनी इस किताब में दर्ज किया है। विगत तीन दशकों के लगातार शोध के बाद लेखक ने अपनी इस किताब में भिलाई से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रम को दर्ज किया है। यह सब किस्से और कहानियों की शैली है। 

इनमें फिल्मी दुनिया, राजनीति से लेकर विभिन्न क्षेत्रों के अतिविशिष्ट लोगों के इस्पात नगरी आगमन से लेकर ऐसे बहुत से तनाव भरे दिन और हादसों का भी विस्तार से उल्लेख है जिन्होंने भिलाई को कई बार झकझोर दिया। इसके साथ ही विदेश में भिलाई का परचम फहराने वाली कुछ हस्तियों का भी जिक्र है।


इस्पात नगरी का रोचक इतिहास प्रमाणित तथ्यों 

के साथ रखती है किताब भिलाई जिंदाबाद: उमाकांत

हमारी अगली पीढ़ी जानना चाहेगी तो बेहतर माध्यम 

साबित होगी किताब भिलाई जिंदाबाद : मेश्राम

सेक्टर-4 में हुआ समीक्षा गोष्ठी का आयोजन, बदलते 

भिलाई की चुनौतियों पर भी हुई चर्चा

गोष्ठी में उपस्थित विशिष्ट समुदाय

मूलनिवासी कला साहित्य और फिल्म फेस्टिवल भिलाई, डॉ अंबेडकर एग्जीक्यूटिव फ्रेटरनिटी भिलाई. डॉ अंबेडकर वेलफेयर सोसायटी छत्तीसगढ़ और एनस्टेप के संयुक्त तत्वावधान में समीक्षा गोष्ठी का आयोजन रविवार 8 फरवरी 2026 की शाम सेल एससी एसटी ओबीसी फेडरेशन भवन, सड़क नंबर 8, सेक्टर 4 में किया गया। जिसमें लेखक एवं पत्रकार मुहम्मद जाकिर हुसैन की  हालिया प्रकाशित किताब "भिलाई जिंदाबाद, कुछ किस्से-कुछ कहानियां" पर प्रमुख वक्ताओं ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने भिलाई को जानने समझने के लिए इसे एक जरूरी किताब बताया।
अतिथियों के स्वागत के उपरांत आधार वक्तव्य रखते हुए प्रसिद्ध कहानीकार मिर्जा हफीज बेग ने कहा कि कई मायनों में उन्हें यह किताब अपनी आपबीती भी लगती है क्योंकि भिलाई में जन्म लेने और भिलाई स्टील प्लांट का सेवानिवृत्त कर्मी होने के नाते इनमें से बहुत से घटनाक्रम से वह खुद भी रूबरू हुए है। उन्होंने कहा कि यह किताब लेखक की पिछली कृति "वोल्गा से शिवनाथ तक" के आगे का सिलसिला है और उसमें रह गई कमियों को पूरा करती है।

आधार वक्तव्य रखते हुए कहानीकार मिर्जा हफीज बेग 

वरिष्ठ रंगकर्मी राकेश बम्बार्डे ने कहा कि जिन्हें अपने शहर भिलाई से प्यार है और जो भिलाई को जानना-समझना चाहता है,वह सभी इस किताब को जरूर पढ़ेंगे। शायर मुमताज ने भिलाई की संस्कृति को किताब के माध्यम से सामने लाने के लिए लेखक की सराहना की और चंद अशआर सुनाए। ऑल पीएसयू एससी-एसटी एम्पलाइज फेडरेशन के चेयरमैन सुनील हरिशचंद्र रामटेके ने कहा कि लेखक ने पिछली किताब "वोल्गा से शिवनाथ तक" में भिलाई के योगदान पर भारतीय और रूसी लोगों के योगदान पर बेहद रोचक ढंग से तथ्यों को रखा था। वही शैली इस किताब में बरकरार है और जिस तरह लेखक ने भिलाई के शुरूआती दौर से अब तक की  तमाम हस्तियों से मिलकर उनका साक्षात्कार लेकर सबके सामने प्रस्तुत किया है, यह सबके बस की बात नहीं। 

उन्होंने दोहराया कि आज जिस तरह भिलाई के सामने नए दौर की चुनौतियां है, उनका सामना करने हमको अपने इतिहास के बारे जानना बेहद जरूरी है। भिलाई स्टील प्लांट के ऊर्जा प्रबंधन विभाग में जनरल मैनेजर कमल टंडन ने कहा कि भिलाई सही मायनों में लघु भारत है और इसका रोचक इतिहास जानने यह किताब सहायक होगी। कवि लक्ष्मीनारायण कुम्भकार ने कहा कि इतिहास को रोचक ढंग से प्रस्तुत करना भी एक चुनौती है और इसे लेखक ने बखूबी पूरा किया है। आकाशवाणी रायपुर के कार्यक्रम प्रमुख पंकज मेश्राम ने कहा कि एक पत्रकार का न केवल स्वतंत्र होना जरूरी है बल्कि उसका निर्भिक  होना और निष्पक्ष होना उतना ही जरूरी है। वो सारे गुण लेखक में मौजूद है। भिलाई पर अगर प्रमाणिक जानकारी चाहिए तो आपको लेखक की इस किताब से जरूर रूबरू होना चाहिए।

संचालनकर्ता रिटायर अपर कलेक्टर विश्वास मेश्राम ने भी रखी अपनी बात 

संचालन कर रहे सेवानिवृत्त अपर कलेक्टर विश्वास मेश्राम ने कहा कि जिस भिलाई को हमने देखा और जीया है, आज वह बदल रहा है।  आज के भिलाई की जो तस्वीर हम देखते हैं, उसे देखकर बहुत खुशी नहीं होती बल्कि एक दर्द सा उठता है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में जब  हमारी अगली पीढ़ी हमारे भिलाई को ढूंढना चाहेगी तो इस किताब में ही पाएगी।
बीएसपी पावर इंजीनियरिंग एंड मेंटेनेंस विभाग में जनरल मैनेजर पीएस खोब्रागड़े ने कहा कि आज सोशल मीडिया और एआई का दौर है और इंटरनेट पर हम तलाशेंगे तो   इतनी प्रमाणित जानकारी नहीं मिल सकती जितनी लेखक ने अपनी किताब "भिलाई जिंदाबाद" में तथ्यों को जुटा कर दी है। 

भिलाई स्टील प्लांट टेलीकम्युनिकेशन विभाग के पूर्व प्रमुख और रिटायर जनरल मैनेजर एल. उमाकांत ने कहा कि लेखक ने जिन घटनाक्रमों को इस किताब में उल्लेखित किया है, उनमें से ज्यादातर के वे गवाह रहे हैं। उन्होंने बताया कि 6 जनवरी 1986 को जिस वक्त हादसा हुआ तो तब भिलाई होटल में दूरसंचार विभाग का एक कार्यक्रम चल रहा था और एमडी के आर संगमेश्वरन भी हमारे साथ उस कार्यक्रम में ही थे। हम सबने उस धमाके की आवाज सुनी थी। उन्होंने कहा कि भिलाई को जानने-समझने इस किताब से बेहतर माध्यम और कोई नहीं है। 

संगोष्ठी में अपनी बात रखते हुए लेखक-पत्रकार मुहम्मद जाकिर हुसैन 

अंत में लेखक मुहम्मद जाकिर हुसैन ने इस किताब की सृजन यात्रा के बारे में विस्तार से जानकारी दी और कहा कि पाठकों का प्रोत्साहन ही उन्हे आगे भी भिलाई के रोचक इतिहास से रूबरू कराने की प्रेरणा देगा। 

इस अवसर पर  भिलाई नगर मस्जिद ट्रस्ट के सदर मिर्जा आसिम बेग,रंगकर्मी एल. रुद्र मूर्ति, मोहन कुमार नामदेव, मुक्तानंद साहू, बिनितोष बाला, गंगा भाऊ जांभुलकर, विजया जांभुलकर, संगीता मेश्राम, उषा मेश्राम, फैजान खान, शारिक खान, चित्रसेन कोसरे, जयश्री मोहन नागदेवे, राजेंद्र सुनगरिया और गजेंद्र सायतोड़े सहित अनेक लोग मौजूद थे। अंत में धन्यवाद ज्ञापन बीएसपी कर्मचारी और रंगकर्मी वासुदेव ने दिया।

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