कभी हम एक ही क्षेत्र से चुनते थे
दो सांसद और दो विधायक
आरक्षित वर्ग को प्रतिनिधित्व देने शुरूआती दो चुनाव
में लागू थी यह व्यवस्था, 1962 के चुनाव से बदला नियम
मुहम्मद
जाकिर हुसैन
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तब ऐसे हुआ था कांग्रेस का प्रचार, बैल जोड़ी था चिन्ह |
क्या
आप जानते हैं, कभी हमारे देश में एक ही लोकसभा और विधानसभा क्षेत्र से दो-दो प्रतिनिधि चुने जाने का नियम था? तब लोकसभा और विधानसभा चुनाव में एक प्रतिनिधि सामान्य वर्ग का तो दूसरा अनुसूचित जाति अथवा अनुसूचित जनजाति समुदाय का चुना जाता था।
यह व्यवस्था 1952 और 1957 के आम चुनाव व विधानसभा चुनावों में लागू रही। बाद में परिसीमन के नए कानून के माध्यम से यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई।
दरअसल
देश की आजादी के बाद हुए पहले लोकसभा-विधानसभा चुनाव के दौरान आरक्षित सीट जैसी कोई व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में तत्कालीन सरकार ने यह व्यवस्था दी कि देश भर में लोकसभा और विधानसभा की कुल सीटों में अजा-जजा बाहुल्य वाले क्षेत्रों में दो सदस्यीय निर्वाचन की व्यवस्था रखी जाए।
जिसमें एक प्रतिनिधि सामान्य वर्ग का हो और दूसरा आरक्षित वर्ग का। यह व्यवस्था 1952 में लागू हुई और 1957 में भी क्रियान्वित की गई। लेकिन इसके बाद तत्कालीन केंद्र सरकार की सिफारिश पर चुनाव आयोग ने नए सिरे से लोकसभा और विधानसभा सीटों का परिसीमन किया। इसके लिए दो सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्र (उन्मूलन)अधिनियम 1961 संसद में लाया गया। जिसके माध्यम से इस व्यवस्था को खत्म किया और अलग से आरक्षित सीटों की व्यवस्था की गई। इस तरह द्वि सदस्यीय निर्वाचन की व्यवस्था खत्म कर दी गई।
अब
बात
1952-1957 के
आम चुनाव में छत्तीसगढ़ में लोकसभा और विधानसभा के लिए एक ही सीट से चुने गए दो प्रतिनिधियों की। 1952 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव साथ-साथ हुए थे। जिसकी अधिसूचना
6 मार्च को जारी हुई। नामांकन पत्र दाखिले की आखिरी तारीख 13 मार्च, नामांकन पत्रों की जांच 14 मार्च, नाम वापस लेने की तिथि 17 मार्च और मतदान की तिथि 27 मार्च थी।
इस चुनाव में छत्तीसगढ़ में सरगुजा, रायगढ़, बिलासपुर, दुर्ग, रायपुर व बस्तर द्विसदस्यीय और महासमुंद, दुर्ग, दुर्ग बस्तर एक सदस्यीय लोकसभा सीट थी। तत्कालीन सीपी एंड बरार प्रांत के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में 62 विधानसभा क्षेत्र थे, जिनमें 20 विधानसभा द्विसदस्यीय थी और 42 में निर्वाचन एक सदस्यीय हुआ।
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हरिभूमि 5 नवम्बर 2018 |
वहीं
विधानसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ की द्विसदस्यीय सीटों में मनेंद्रगढ़ से ज्वाला प्रसाद निर्दलीय व प्रीतराम कुर्रे कांग्रेस (निर्विरोध), पाली विधानसभा से धर्मपाल निर्दलीय व भंडारी कांग्रेस, अंबिकापुर से महाराज रामानुज शरणसिंह कांग्रेस व ठाकुर परसनाथ निर्दलीय (निर्विरोध), जशपुर नगर से राजा विजय भूषण सिंह देव रामराज्य परिषद और जोहन किसान मजदूर प्रजा पार्टी, घरघोड़ा से दुर्गाचरण कांग्रेस और राजा ललित कुमार कांग्रेस, धरमजयगढ़ से राजासाहब चंद्रचूड़ प्रसाद सिंह कांग्रेस और दूधनाथ कांग्रेस, सारंगढ़ से नरेशचंद्र सिंह कांग्रेस और वेदराम कांग्रेस, कटघोरा से आदित्य प्रताप सिंह कांग्रेस और बनवारी लाल कांग्रेस, मुंगेली से रामगोपाल तिवारी कांग्रेस और अंजोर दास निर्दलीय, जांजगीर पामगढ़ से गणेशराम अन्नत कांग्रेस व महादेव मुरलीधर निर्दलीय,अकलतरा मस्तूरी से कुलपत सिंह कांग्रेस और हाजी मोहम्मद मसूद खान कांग्रेस,चंद्रपुर बिर्रा से गजानंद कांग्रेस और शशिभूषण सिंह निर्दलीय, आरंग खरोरा से लखनलाल गुप्ता कांग्रेस व केसूराम किसान मजदूर प्रजा पार्टी, भाटापारा सीतापुर से बाजीराव बिहारी कांग्रेस व चक्रपाणी शुक्ला कांग्रेस, कोसमंडी कसडोल से नैनदास कांग्रेस व बृजलाल किसान मजदूर प्रजा पार्टी,कांकेर से भानुप्रताप देव निर्दलीय व रतन सिह निर्दलीय, केशकाल से (द्विसदस्यीय होने के बावजूद) एकमात्र प्रत्याशी राजभान निर्दलीय निर्विरोध, बेमेतरा से जगतारण दास कांग्रेस व विश्वनाथ यादव तामस्कर निर्दलीय, बोरी-देवकर से रानी पद्मावती देवी कांग्रेस व भूतनाथ कांग्रेस, बालोद से केशवलाल गोमाश्ता कांग्रेस व दारन बाई कांग्रेस निर्वाचित हुए।
राष्ट्रपति
ने 19 फरवरी 1957 को दूसरे संसदीय निर्वाचन के लिए अधिसूचना जारी की। इस दौरान लोकसभा और विधानसभा के चुनाव साथ-साथ हुए। जिसमें नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि 29 जनवरी, नामांकन पत्रों की जांच की तिथि 1 फरवरी, नाम वापस लेने की तिथि 4 फ रवरी थी। वहीं इस बार मतदान 24 फरवरी से 15 मार्च के बीच अलग अलग तिथियों में हुआ।
इस
दूसरे लोकसभा चुनाव में मध्यप्रदेश में कुल 9 संसदीय क्षेत्र थे, जिसमें 7 छत्तीसगढ़ से थे। जिसमें तीन संसदीय क्षेत्र द्विसदस्यीय थे। छत्तीसगढ़ में तब 57 विधानसभा क्षेत्र थे, जिसमें 24 द्विसदस्यीय और 23 एक सदस्यीय रखे गए थे। इन चुनावों में कुछ क्षेत्र परिसीमन के अंतर्गत नए सिरे से घोषित किए गए थे।
यहां
निर्वाचन उपरांत चुने गए सांसदों में लोकसभा के अंतर्गत सरगुजा से बाबूनाथ सिंह कांग्रेस व महाराज कुमार चंडीकेश्वर कांग्रेस,बलौदाबाजार से मिनीमाता कांग्रेस व विद्याचरण शुक्ल कांग्रेस, रायपुर से राजा वीरेंद्र बहादुर सिंह कांग्रेस व रानी केशव कुमारी देवी कांग्रेस को प्रतिनिधित्व का अवसर मिला।
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किसान मजदूर प्रजा पार्टी का चुनाव चिन्ह था झोपड़ी |
वहीं
विधानसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ की द्विसदस्यीय सीटों में मनेंद्रगढ़ से बृजेंद्र लाल कांग्रेस और रघुवर सिंह, सूरजपुर से धीरेंद्रनाथ शर्मा कांग्रेस और महादेव कांग्रेस, पाली से भंडारी कांग्रेस और कपिलदेव नारायण सिंह कांग्रेस, अंबिकापुर से बृजभूषण कांग्रेस और प्रीतम कुर्रे कांग्रेस, जशपुर नगर से राजा विजय भूषण सिंह देव कांग्रेस और जोहन कांग्रेस, घरघोड़ा से गौरीशंकर शास्त्री कांग्रेस और राजा ललित कुमार कांग्रेस, धरमजयगढ़ से राजासाहब चंद्रचूड़ प्रसाद सिंह कांग्रेस और उम्मेद सिंह कांग्रेस, सारंगढ़ से नरेशचंद्र सिंह कांग्रेस और नन्हू दाई कांग्रेस, कटघोरा से रूद्रशरण प्रताप सिंह कांग्रेस और बनवारी लाल कांग्रेस, कोटा से कांशीराम तिवारी कांग्रेस और सूरज कंवर कांग्रेस,मुंगेली से रामलाल घसिया रामराज्य परिषद और अंबिका साव रामराज्य परिषद,मस्तूरी से बशीर अहमद कांग्रेस और गणेशराम अनंत कांग्रेस, चंद्रपुर से शशिभूषण सिंह निर्दलीय और वेदराम कांग्रेस, आरंग से लखनलाल गुप्ता और जगमोहन दास,बलौदाबाजार से बृजलाल प्रजा सोशलिस्ट पार्टी और नैनदास कांग्रेस, भटगांव से जितेंद्र विजय बहादुर निर्दलीय और मूलचंद कांग्रेस, महासमुंद से नेमीचंद कांग्रेस और मिरिहानी राव कांग्रेस, बिंद्रा नवागढ़ से श्यामाचरण शुक्ला कांग्रेस और श्यामाकुमारी कांग्रेस,कांकेर से प्रतिमा देवी कांग्रेस और विश्राम कांग्रेस, जगदलपुर से दोरहा प्रसाद कांग्रेस और महाराजा प्रवीरचंद्र देव कांग्रेस, बेमेतरा से लक्ष्मण प्रसाद कांग्रेस और शैवलाल कांग्रेस, भिलाई से गोविंद सिंह कांग्रेस और उदयराम कांग्रेस, डोंगरगढ़ से विजयलाल
कांग्रेस और भूतनाथ कांग्रेस चुने गए थे।
इन
चुनावों में मुख्य रूप से कांग्रेस का चुनाव चिह्न दो बैलों की जोड़ी,सोशलिस्ट पार्टी का बरगद का पेड़, फारवर्ड ब्लॉक का पंजा छाप, किसान मजदूर प्रजा पार्टी का झोपड़ी, भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी का हंसिया-हथौड़ा व धान की बाली, रेवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) का बेलचा-फावड़ा, भारतीय जनसंघ का दीया,अखिल भारतीय रामराज्य परिषद का उगता हुआ सूरज, ऑल इंडिया शेड्यूल कास्ट फेडरेशन का हाथी, अखिल भारतीय हिंदू महासभा का घोड़े पर सवार घुड़सवार, फारवर्ड ब्लॉक (माक्र्सिस्ट)का दहाड़ता शेर थे।
(क्रमशः)
अगली क़िस्त
2 कुथरेल,भाठागांव से वैशाली नगर तक कटता-बंटता भिलाई नगर
3 दुर्ग विधानसभा के पहले चुनाव में प्रचार के आखिरी दिन बदल गई थी फिजा
3 दुर्ग विधानसभा के पहले चुनाव में प्रचार के आखिरी दिन बदल गई थी फिजा
बहुत ही अच्छी जनकारी है धन्यवाद
ReplyDeleteबहुत अधिक मेहनत के साथ जानकारी को संकलित किया गया होगा।जो हमें सहज ही आपके माध्यम से उपलब्ध हो गया। छःग के संबंध में ऐसी जानकारी मैं बहुत दिनों से खोज रहा था।आज मिला तो मन को बहुत संतुष्टि मिली।बहुत-बहुत धन्यवाद।
ReplyDelete1937 में सी पी एवं बरार में विधानसभा चुनाव
हुआ था।छःग क्ष्रेत्र से निर्वाचित विधायकों के बारे में जानकारी खोज रहा हूँ।कृपया इसके बारे में भी जानकारी देने की कृपा करें।